कमप्युटर की क्लास में मिली धमकी के बाद क्लास में रूकने की ना हिम्मत बची थी न कोई मतलब ।
किसी तरह हिम्मत जुटाता विश्वविधालय से निकलकर हम बगीया पर पहुंचे । जब हिम्मत टुट रही हो और पर्स भी हल्का हुआ पड़ा हो तो चाय से बेहतर साथी कोई नहीं होता । अपनी इसी मुहब्बत के साथ हम सब बैठे थे , कोई अपनी कहानी बयाँ करने में लगा था कोई विश्व राजनीति में।
हमेशा की भाती " कुछ दे दो बेटा" आवाज आई । बगीया में बैठे हुए ऐ कोई नई बात नहीं थी, मगर आज ऐ नए लोग थे । आँखें उपर उठी तो देखा एक दादा जी करीब 70-75 की उम्र होगी ने दादी का हाथ पकड़ रखा था , दादी देख नहीं सकती थीं, फटे - पुराने कपड़े फिर भी चेहरे पे मुस्कुराहट ।
मुझे ऐसे लोगों पर हमेशा से भरोसा नहीं होता, मगर हमेशा की तरह आज भी वासु ने मेरे मना करने के बावजूद उन्हें चाय देने के लिए दद्दा के बोल ही दिया। खैर मैं जानता था वासु ऐ करेगा, अब मैं उसे इस बारे में समझाता भी नहीं ।
उन्होंने अपना सामान वही रखा और सामने ही बैठ गए , और ऐ सब दुबारा अपनी चर्चा में लग गए । मेरी आँखें अभी भी उन दोनों पर टीकी थीं, चाय के आने पर दादी ने अपने झोले से एक कटोरा निकाला शायद ग्लास से गर्म चाय पीने में उन्हें दिक्कत हो रही थी । फिर दादा ने एक ग्लास की चाय उनके कटोरे में डाल दिया , उसके बाद दादी के चेहरे पर एक मुस्कान फुटी वो अभी भी अपने कटोरे को दादा के आगे कीए थीं । फिर मुस्कुराते हुए दादा ने अपने ग्लास से भी आधी चाय उनके कटोरे में डाल दी और हल्के से उनके सर पे सहलाया, अब दादी चाय पी रही थी और दादा की प्रेम और संतोष से भरी आँखे उन्हें निहार रही थी ।
लेशमात्र भी स्वार्थ नहीं तनीक भी कोई और भाव नहीं बस विशुद्ध मुहब्बत और आँखों से उमडता प्रेम । मेरी हालत उस इन्सान के जैसे थी जिसके सामने साक्षात् कोई ईश्वरीय दृश्य हो , कृष्ण और राधा का प्रेम भी ऐसा ही रहा होगा या शायद उस प्रेम में भोग की , काम की पीपासा होगी । यह तो दो आत्माओं का प्रेम था किसी भी सांसारीक दुख ,किसी भी लोभ से कहीं उपर । बस प्रेम की एक अनुभुती एक दिव्य बंधन ।
पहली बार किसी के सामने मैनें खुद को इतना गरीब इतना तुच्छ पाया ।
इससे पहले मैं उठता , कुछ पुछता वो दुबारा आगे बढ चुके थे ," कुछ दे दो बेटा, कुछ दे दो "।
कैसे बताउँ उन्हें कितने अमीर हैं वो और मैं कीतना गरीब ?
क्या दे सकता हूँ मैं उन्हें ?
अद्भुत छमता एक छोटी सी घटना में से बड़ी बाते ख़ोज निकालने की
ReplyDeleteआभार भाई का ।
ReplyDeleteHeart touching buddy......
ReplyDeleteलिखना सफल हुआ :)
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