आज
जब आँखें खुलीं तो उनमें एक
अजीब सी चमक थी , वह
ना चाहकर भी बार बार मुस्कुरा
रही थी । काम तो वही था रोज की
तरह लेकिन उस काम में भी एक लय
एक अजीब सी थिरक थी आज ।
जब
उस आधे शिशे के सामने खड़ी हुई
तो खुद को लगातार निहारे जा
रही थी एक सम्मोहन का शिकार
होती जा रही थी , करीब
5 साल
हो गए जब वह इस शिशे को उस मोटी
बुड्ढी के बरामदे से उठा कर
लाई थी , अपने
दोस्तों को उस रोज की कहानी
सुनाकर अक्सर मिनी अपने दोस्तों
के साथ ठहाके लगाया करती थी
, किस्सा
था ही मजेदार , सब
कितना डरते थे उससे मगर उस दिन
मिनी ने उसके दात खट्टे कर दीए
थे , कितना
तेज भागी थी वो उस शीशे को लेकर
, बुढ़िया
तो 5 मिनट
में हाफ़ने लगी थी ।
आज
मगर उसके होठों पर हँसी नहीं
मुस्कुराहट थी , पिछले
पाँच सालों में पहली बार वह
खुद को इतने प्यार से ,
इतने बारीकी
से देख रही थी ।
उसके
चमकते ललाट पर बार बार उसके
काले बाल जो अब कुछ हद तक भुरे
दिखने लगे थे , अटखेलीयाँ
कर रहे थे , नाक
मानों उन इन दो बड़ी ब़ड़ी
आँखो के बीच से सर्रर से किसी
खुबसुरत से ढ़लान के जैसी लग
रही थी , होंठ
तो मानों मुस्कुराते मुस्कुराते
थक सी गई थी मगर गालों के बीच
की लाली इन सब से अलग अपनी ही
कहानी कह रहे थे और इन सब को
समेटे एक प्यारा सा चेहरा जैसे
किसी कलाकार की सबसे अव्वल
रचना हो , मगर
उसके उन बालों को हटाने के लिए
जब उसने हाथ बढ़ाए तो वेग से
बह रही उस अनंत ख्यालों की रेल
को एक ब्रेक सा लग गया ।
कितने
काले पड़ गए हैं हाथ उसके ,
जगह जगह
से स्याह पड़ गए हैं ,
मंजु चाची
भी अक्सर कहा करती है,
अभी मिनी
के 2 महिने
पहले ही तो 18 साल
हुए हैं लेकिन हाथ जैसे किसी
अम्मा के हों । अब रोज न जाने
वह हाथ कितने ही कच़डे की
पेटियों को तलासते हैं वह नरम
कैसे होंगे , लेकिन
बस अब वह अपना पुरा ख्याल रखेगी
, फ़ैसला
कर लिया था मिनी ने एक वक्त
खाना ना खाएगी तो कोई बात नहीं
मगर आज आते वक्त साबुन लेकर
आएगी , अब
राख से हाथ साफ़ नहीं करेगी
वो ।
जब
से होश सँभाला मिनी ने खुद को
शहर के कोने में बसी बस्ती में
ही पाया है , ना
कभी अपने अब्बा को देखा ना
किसी रिश्तेदार को लेकिन माँ
की शक्ल उसे कुछ कुछ याद है ।
एक दिन अम्मा काम पर गईं थी
मगर वापस नहीं आई , गाँव
वालों ने ना जाने कितनी ही
बातें कहीं मगर मिनी ने हौसला
नहीं हारा , दो
दो दिन तक भूखी रही लेकिन कभी
किसी और से नहीं माँगा । काम
की बड़ी पक्की है वो पुरी बस्ती
तारीफ़ करता है उसकी ,
दिन भर
मेहनत कर लेती है और अब तो पैसे
भी बचा लेती है , पिछले
सप्ताह पुरे 50 रुपए
बचाए थे और मेले में भी गई थी
।
अब
लेकिन काम नहीं करेगी मिनी
बिल्कुल भी नहीं , आज
वह सागर से मिलने जा रही है ।
मुश्किल से महीने भर पहले तो
मिली है वो लेकिन लगने लगा है
की साल बीत गए हैं ,
वह उसकी
तरह काम नहीं करता स्कूल जाता
है , नहीं
नहीं कॉलेज में पढ़ता है ,
सागर
की नौकरी भी लग जाएगी वह कहता
है फिर दोनों इस शहर को छोड़
कर चले जाएँगे ,
दिल्ली
में रहेंगे । दिल्ली का सोचकर
खुश हो जाती है वो ,
वहाँ
बिजली होगी और पानी के लिए
लाईन भी नहीं लगाना पड़ेगा ।
उस
दिन कितनी खुश थी वह मेले में
, वहीं
तो मिली थी सागर से । लगातार
घुरे जा रहा था उसको ,
पहले
तो लगा की कोई लफंगा होगा मगर
जब एक बार बात की तो उसकी बातों
में बहती चली गई जैसे ,
कितनी
मिठी बातें करता था ,
कविताँए
भी लिखता था , अपना
मोबाइल भी था ,
कितनी
फोटो ली थी उसने मिनी की ,
वह कहता
smile और
मिनी खिलखिला कर हँस देती ।
जब
सागर से मिलकर वापस आई तो वह
कुछ ज्यादा ही खुश थी वह ,
आज सागर
ने कहा की उसको नौकरी लग गई है
वो दोनों अगले हफ्ते की रेल
से दिल्ली चले जाएंगे । पहली
बार रेल बैठने का सोच कर डर
रही थी मिली लेकिन फिर सागर
साथ होगा यह सोचकर ड़र काफुर
हो जाता ।
क्या
क्या ले जाएगी वो अपने साथ ?
कितनी
बेवकुफ़ी वाला सवाल है ,
है ही
किया उसके पास दो बर्तन और
कपड़े और माँ की दी हुई वो वाली
माला , मोतीयों
वाली , उसमें
भी कुछ मोतियों का रंग उतर गया
है मगर कैसे फेंक दे एक वही
गहना तो है उसके पास । सागर ने
कहा है बस खाली हाथ आ जाने को
, दिल्ली
में उसके लिए नए कपड़े लेगा
वो ।
अगले
एक हफ्ते तक सो भी नहीं पाई वो
, अपनी
झोपडी रामु काका को दे दी ,
बेचारे
सड़क पर सोते थे ,
घंटो
आशीर्वाद देते रहे थे उसको ।
रेलगाड़ी
में बैठने के बाद उसका ड़र
खत्म हो गया , सागर
से रास्ते भर बस दिल्ली का हाल
पुछती रही वह और सागर मुस्कुराकर
बताता रहा , सागर
ने बताया उसके परिवार में भी
कोई नहीं है ,
कितनी
मिलती है उनकी कहानी मिनी भी
तो अकेली है दुनिया में । अब
वो कभी सागर को अकेलापन महसुस
नहीं होने देगी ,
उसका
पुरा ख्याल रखेगी ,
इन्हीं
ख्यालों में कब उसने सागर के
कँधो पर सर रखकर आँखे मुँद ली
पता ही नहीं चला ,
एक सुकुन
था उसके बाहों में जैसे जिंदगी
बस रुक सी गई हो सब थम गया हो
।
जब
आँखे खुली तो ट्रेन लगभग खाली
हो गई थी सागर जल्दी जल्दी
जुते पहन रहा था और उसे उठा
रहा था ।
सागर
ने कहा की उनके रहने का इतंजाम
हो गया है अब उनकी जिंदगी राजा
की तरह कटेगी ,
दोनों
एक कमरे में पहुँचे थोड़ा छोटा
था मगर कितना प्यारा ,
वह कमरा
उसे उसे स्वर्ग लग रहा था और
सागर के चेहरे में कोई देवदुत
, कितनी
बदल गई थी उसकी जिंदगी पिछले
महिनों में , बिना
मतलब कोसती थी वह उपर वाले को
।
सागर
और वह कपड़े बदलकर वहीं लेट
गए , रात
भर एक दुसरे में इस कदर खो गए
मानों की दो नहीं एक शराीर हो
, प्यार
को साबीत करने का वो अंतहीन
सिलसिला रात भर चलता रहा ।
पहले भी सागर ने कहा था उसको
लेकिन मिनी हर बार टाल देती
थी , साथ
की लड़कीयाँ कहती थी यह सही
नहीं है लेकिन बस अब और नहीं
आज तो वह खुद को सागर को सौंप
देना चाहती थी ,
अब कोई
कारण भी तो नहीं था दुरी बनाने
का , आखीर
अब दोनो एक हो गए थे ।
सुबह
सागर उसे लेकर अपनी मौसी से
मिलने के लिए चलने को कहा ,
नए कपड़े
और गहने लेकर आया था वो कहा की
मौसी के साथ मंदीर जाकर के
शादी कर लेंगे फीर साथ हमेशा
के लिए । मौसी भी बड़ी खुशमिजाज
थी , बात
बात पर हँसी मजाक कर रही थी ,
सबने
साथ में खाना खाया और सागर
शादी के सामान लाने बाहर चला
गया ।
जब
से खाना खाया था मिनी को निंद
आ रही थी तो वह सोने को चली गई
, जब
वह सोकर उठी तो सागर वहाँ नहीं
था । जाकर मौसी से मिली तो
उन्होनें उसे अँधेरे कमरे
में धकेल दिया ,
ना जाने
कितने दिनों तक खाना नहीम दिया
पानी भी नहीं । जब बाहर निकाला
तो कई गिद्ध की भाँती उसपर टुट
पड़े, उसकी
बोली लगी । एक छोटे से कमरे
में , बस
एक बिस्तर में सिमट गई थी मिनी
की जिंदगी , साथ
की लड़कीयाँ कहती थी की एक लाख
में उसका सौदा हुआ था लेकिन
मिनी मानने को तैयार नहीं थी
जरुर इन लोगों ने उसके सागर
के साथ कुछ कर दिया होगा ।
रोज
ना जाने कितने मर्द उसके कमरे
में आते , इसके
रुह को छलनी करते मगर आज भी
मिनी हर चेहरे में सागर को
ढुँढती थी , ना
जाने कब आएगा वो शादी का समान
लेकर ।
अंतहीन
सफर जारी है , आज
भी मिनी सागर के पसंद की गुलाबी
साड़ी ही पहनती है ।।।

बहुत खूबसूरत सैराट दिखाओ हो..😊
ReplyDeleteबस वो सागर नाम नहीं लिखना था!!😛😛😛😛😛
वही तो मैन एटरेक्सन है
Delete;)
बेहद खूबसूरत 👍👍
ReplyDelete❤
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