Monday, 14 October 2019

गरीबी से लड़ने के वैज्ञानिक प्रयासों को नोबेल का सम्मान



सोमवार की शाम पूरा देश एक साथ सोशल मीडिया पर अभिजीत बनर्जी को बधाई देने के लिए उमड़ पड़ा। अभिजीत बनर्जी को इस वर्ष ' वैश्विक गरीबी को कम करने के लिए प्रायोगिक दृष्टिकोण' के लिए एस्थर दुफ्लो एवं माइकल क्रेमर के साथ संयुक्त रूप से अर्थशास्त्र के नोबेल से सम्मानित किया गया है। एस्थर और अभिजीत छठे विवाहित दंपत्ति हैं जिन्हें संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

अभिजीत मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में अर्थशास्त्र के फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल प्रोफेसर हैं और उनका काम विकास अर्थशास्त्र पर केंद्रित है। एस्तेर डफ़्लो, माइकल क्रेमर, जॉन ए लिस्ट और सेंथिल मुलैनाथन के साथ मिलकर अभिजीत ने अर्थशास्त्र में कैजुअल रिलेशनशिप की खोज के लिए एक महत्वपूर्ण पद्धति के रूप में फील्ड एक्सपेरिमेंट्स का प्रस्ताव दिया है।

वर्ल्ड बैंक के वाशिंगटन मुख्यालय के बाहर एक पत्थर लगाकर बैंक का मिशन उसपर दर्ज किया गया है, इस पत्थर पर लिखा है 'गरीबी से मुक्त विश्व हमारा सपना है'। विकासशील एवं विकसित देशों ने गरीबी उन्मुलन को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है और यही कारण है कि 1990 में जहाँ विश्व की 36% आबादी रोजाना 1.9 अमेरिकी डॉलर से कम में अपना जीवन बसर कर रही थी वहीं 2013 में यह आंकड़ा 11% और 2015 में केवल 10% रह गया है। वैश्विक कारोबार एवं अंतरराष्ट्रीय प्रयासों ने लगातार लोगों के जीवनस्तर को सुधारा है लेकिन यह प्रयास सब सहारा अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में कारगर सिद्ध होते नहीं दिख रहे। वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक अगर स्थितियों में बदलाव नहीं आये तो 2025 तक गरीबी रेखा के नीचे जीवन बसर करने वाले विश्व के 10 में से 9 लोग सब सहारा अफ्रीका से होंगे। 

यह आँकड़े हमें बताते हैं कि गरीबी उन्मुलन के इतने प्रयासों के बावजूद हमसे कुछ कमियां रह गयी हैं और इन्हीं कमियों को दूर करने का प्रयास अभिजीत सालों से कर रहे हैं। अभिजीत अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब के सह-संस्थापक हैं जिसमें वह अर्थशास्त्री एस्तेर डुफ्लो और सेंथिल मुलैनाथन के साथ मिलकर गरीबी उन्मुलन के इन प्रयासों को वैज्ञानिक एवं परियोजनामुलक बनाना चाहते हैं। 

2006 में प्रकाशित अभिजीत की किताब 'अंडरस्टैंडिंग पॉवर्टी' गरीबी के अर्थशास्त्र को समझने एवं गरीबी उन्मुलन के प्रयासों को सुनियोजित एवं वैज्ञानिक बनाने के तरीकों के लिए एक रूपरेखा प्रस्तुत करती है। 2011 में अभिजीत ने एस्थर के साथ मिलकर एक पुस्तक ' पुअर इकोनॉमिक्स - ए रैडिकल रीथिनकिंग ऑफ द वे टू फाइट ग्लोबल पॉवर्टी' प्रकाशित की जो की इस विषय पर विस्तृत एवं अध्यानात्मक विवेचना प्रस्तुत करती है। इस पुस्तक को विश्व भर के अर्थशास्त्रियों एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी सराहा।

अभिजीत का प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता और जेएनयू दिल्ली से नोबेल का यह सफर सफलता की कहानी तो है हीं साथ ही एक प्रयास है उस दुनिया को और बेहतर बनाने का जिसमें हम रह रहे हैं।