Monday, 7 March 2016

राह भटकाती तीसरी राह.............

भारत के सियासी रंगमंच में आजकल जो ड्रामा चल रहा है वो किसी से छुपा नहीं है । हर तरफ से नए किरदार एस नाटक में कुद रहे हैं और उन नए किरदारों को उठाकर राजनीतिक पार्टियां अपना उल्लु सिधा करने में लगी हैं । कोइ राजनीति छोडकर विडियो के विश्लेशन में लगा है तो कोइ चिखें मार मार कर रो रहा है और जाती के प्रमाण पत्र बांट रहा है । भारत को न जाने कितने हीं अनमोल हीरे छात्र राजनीति के माध्यम से मिले हैं , मगर अब अपने स्वार्थ के लिए इस युवा वर्ग को भटकाने की कोशीश की जा रही है ।
दरअसल भारत अभी एक ऐसे राजनीतिक क्रांती के दौर से गुजर रहा है जहां सबकुछ तुफानी गती से बदल रहा है चाहे वो वोटरों के सोचने का तरीका हो , पार्टियों के मुद्दे हो या नेताओं की प्राथमिकता । इस बार के लोकसभा चुनावों के नतीजे इसी बदलती सोच के परिणाम थे , कोइ कुछ भी कहे मगर पुरा राष्ट्र इस बात को समझ रहा है की इस बार के चुनाओं में भाजपा की जीत नहीं बल्की कांग्रेस की हार हुई है । कांग्रेस के लगातार 10 वर्ष के शासन के बाद जनता तंग आ चुकी थी और एक ऐसे विकल्प के तलाश में थी जो की कांग्रेस की जगह ले सके और भाजपा खुद को उस पैमाने में बैठाने में सफल रही , मगर भाजपा भी पिछले समय में कोई ऐसा निर्णय नहीं ले पाई जो की जनता को लुभा सके और इस कारण जनता के मन में जो रोष पैदा हुआ है उसे तमाम राजनीतिक ताकतें अच्छे से समझ रही हैं और पिछले समय में खड़े हुए तमाम आंदोलन इसी मौके को भुनाने की कोशीश हैं, अन्ना के आंदोलन के खड़ी जनसैलाब उसी परिवर्तन की माँग कर रही थी मगर अरंविद केजरीवाल ने उसे सुक्ष्म रुप में हीं समझ पाए और राजनीति में कुद पड़े इसके बावजुद जनता ने उन्हे हाँथो हाथ लिया और बदलाव के इसी बयार के सहारे वो दिल्ली की कुर्सी तक पहुँच गए। हर व्यक्ती जो इस शतरंज को समझता है वो इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहता है लेकिन यह समझना अब हमारी जिम्मेदारी है की जनता के हितों को ताक में रखकर किए गए आंदोलनों से निकले हार्दिक पटेल और कन्हैया जैसे नेता जनता के लिए क्या करेंगे ?
क्या ये हिरो साबीत होंगे या फीर उन्हीं की तरह बन जांएगे जो की भ्रष्टाचार के विरोधी जे पी आंदोलन से खड़े हुए मगर आज भ्रष्टाचार के सबसे बड़े सौदागर आज वही हैं । जी हाँ हम इन छात्र आँदोलन से खड़े नेताओं की युवा बिग्रेड़ को देश का भविष्य घोषीत कर दें उससे पहले यह भी सोच लेना होगा की आज जिनके घरों से भ्रष्टाचार की बैत्रनी बह रही है वो नितिश लालु भी कुछ ईसी तरह के भाषण देकर , कुछ इसी नाटकीय अंदाज में राजनीति में आए थे ।


Tuesday, 1 March 2016

जुबान भी जरूरी है

वर्तमान समय में आपकी सफलता का पैमाना इस बात से बिल्कुल सबंध नहीं रखता की आप कितने बड़े कदम लेते हैं, सफलता का सीधा सबंध आपकी जीभ की लंबाई से है , यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितनी लंबी जीभ निकाल सकते हैं।
गद्देदार ऊँची कुर्सियों में बैठे लोगों के पास में आपको अक्सर ऐसी लंबी कतार दिखेगी जो जीभ निकाले,लार टपकाते बस इसके इतंजार में रहते हैं कि कब इशारा हो और वो महीनों की मेहनत से अर्जित अपनी कला का प्रदर्शन करें।
इन चाटुकारों में भी प्रतीस्पर्धा की होड़ मची है। आपको चौराहों पर, चौपालों पर बैठे अपनी जीभ की लंबाई मापते है। कुछ लोग तो इतने सम्रपीत होते है कि खुद पर हो रहे तलवारों के वार को भी बहादुरी से झेल जाते हैं, नाक का इस्तेमाल ढाल की तरह होता है। तलवारों और कटारों के बरसात में नाक भले ही कट जाए मगर जीभ की लंबाई में इंच भर की कमी कतई बर्दाश्त नहीं होती।
जीभ की लंबाई का ये मोह पुरी तरह से गलत भी नहीं है क्यूंकि कुछ लोग जीभ का इस्तेमाल सिढीयों की तरह करने लगे हैं,जीतनी लंबी आपकी जीभ होगी,जीतनी ज्यादा लार आप टपका सकते हैं उतनी ही प्रगति आपकी होगी। इस प्रजाति के लोग आपको हर तबके में मिल जाएंगे,संभव है कि इस वक्त आपके बगल में बैठा व्यक्ति भी 1½ फीट लंबी जुबान का मालिक हो , इस प्रकार के व्यक्तियों की पहचान कर पाना कतई आसान नहीं है।
समान्य चेहरा मोहरा , समान्य कद बिल्कुल  आपकी तरह दिखने में , इनसे निपटने के बस दो तरीके है " या तो दो हाथ की दुरी रखें या इनसे दो हाथ लंबी जीभ विकसित करें ।
               ||जनहित में जारी ||