माँ पता चला कि आज आप आयीं थी इस छोटे से पृथ्वी पर, जानकर बहुत प्रसन्न था कि अब आप अपने पुत्रों से जरूर मिल कर जाँएगी मगर लगता है पेट्रोल की बढ रही कीमतों का असर आप पर भी पड़ा है। आप बीच रास्ते से ही लौटकर चली गईं , याद नहीं आता कि माते की आखिरी बार कब आपके दर्शन हुए थे ,मेरे ये नयन आपके दर्शन को तरस गए थे।
ना ना ना माते ऐसा मत समझो की मैं आपसे इसलिए मिलना चाहता था कि मिलकर कुछ ज्ञान ऐंठ सकुँ, मुझे अपनी औकात का ज्ञान भलीभाँति है,मैं जानता हूँ कि मेरे Database में ज्ञान की फाइल्स सपोर्ट नहीं करतीं । माता मैं तो आपसे कुछ सवाल करना चाहता था आपसे कुछ शिकायतें करना चाहता था। खैर आप ना मिलीं तो सोचा चिट्ठी ही लिख दुँ वैसे भी आजकल चिट्ठियों को काफ़ी तरजीह दी जा रही है,किसी को चिट्ठी लिखना आ जाए तो वो सेलेब्रिटी बन जाता है। मुझे कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग लिखनी आती है मगर मेरी कोई पुछ नहीं और मैं एक ऐसे लड़के को जानता हुँ जिसे चिट्ठी लिखनी आती है, उसे रोज लडकियाँ घेर कर चिट्ठियाँ लिखवाती हैं । माता मैं बता दे रहा हुँ ताकी आप समझ सको की चिट्ठी लिखने के लिए किस ओहदे के समर्पण कि जरूरत होती है, इतने समर्पण से तो बाल्मिकि ने भी आपको नहीं भजा होगा ।
वैसे तो आप विज्ञा की Creator हो मगर लगता है तुमने इसे कहीं कहीं गलत जगह पर इंसटाल कर दिया है,कुछ जगहों पर तो इतनी भारी मात्रा में है कि वो 5000₹ तक ले जाने का दंभ भरते हैं,ऐसा असमान वितरण क्यूँ? क्या हम तुम्हारे बेटे नहीं थे जो हमसे ऐसा बैर रखा । उसे 5000 जितनी दी अच्छी बात है शायद बचपन में वो तुम्हारी एक आवाज पर खड़ा हो जाता होगा, मगर माता कभी तो घुटने मैंने भी मोड़े होगें मुझे 3000 जितना ही दे देती । फीर अचानक याद आया की लक्ष्मी और सरस्वती एक जगह कभी नहीं रहते और अपनी खाली जेब देखकर मैं समझा कि तुम मुझसे कितना प्रेम करती हो ।
मगर माँ तुम्हारे और लक्ष्मी मौसी के झगडे में तुम्हारे इस बेटे को बहुत तकलीफ सहनी पड रही है । वैसे तो माँ ऐ युनिवर्सिटी वाले तुम्हे और मौसी को मिलाने की कोशीशें कर रहे हैं, ऐ सरस्वती वालों को लक्ष्मी दे रहे हैं ,मगर माँ ऐ तुम्हारी उपस्थीती का पता परिक्षा से लेते हैं और उस परिक्षा को देने के लिए भी लक्ष्मी देनी पडती है । पिछले साल तो तुम्हारा एक बेटा लक्ष्मी मौसी को नहीं ला पाया तो उन्होंने चेक ही नहीं किया कि तुम उसके अंदर हो की नहीं । माँ तुम उपर में जाँच आयोग बैठाओ मुझे ऐसा लगता है कि तुम्हारी रसोई का खाते हैं मगर इन्होंने लक्ष्मी मौसी से हाथ मिला लिया है ।
बाकी बातें। अगले खत में लिखता हुँ।
जवाब के इतंजार में
तुम्हारा बेटा
सौरभ

